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लेखनी प्रतियोगिता -28-Dec-2022

                   सिंदूर की किंमत

      राजपुरा नाम का पंजाब का छोटा सा कब्जा  उसमे आयी अचानक बाढ। बाढ मे बहे अनगिनत लोग। 
कई परिवार बिखर गये। कई लोगो के अपने बिछड गये। 
उसमे से एक परिवार था आदित्य सिंह का।  आदित्य  का  भरा पूरा परिवार एकदम से बहते पानी मे बह गया।  

       आदित्य ने  पूरा पंजाब छानकर  देख लिया। फिर भी कोई उसे ना मिल पाया।  ऐसे ही २० साल गुजर गये। आदित्य ने उम्मीद  छोड दी। ऐसे मे एक औरत बेसहारा
और लाचार उसके दरवाजे पर मदद की गुहार लगाते हुये आयी। उसके साथ एक छोटी बच्ची भी थी। 

   आदित्य को उस बच्ची पर तरस आ गया तो  उस ने उन दोनो को सहारा देने का फैसला  लिया। आदित्य ने उन दोनो को घर मे ऱखने का निर्णय लिया। तभी भी लोग उनके रिश्ते पर सवाल उठा रहे थे। आदित्य ने तंग आकर. उन दोनो को घर से दुर रख दिया। उस औरत का नाम जानकी था। वो आदित्य के बिवी कि सहेली थी। 

   जानकी का भी परिवार खत्म हो गया था। आदित्य को जानकी की बच्ची पर बडा प्यार आता था। वे दोनो घर से दूर चले गये पर आदित्य का मन उनके बिना ना लगता था। इसके लिये वो अपना मन किसी भी जगह लगाने की कोशिश करने लगा । 

     दिनभर तो कोई दिक्कत ना होती पर रात को आदित्य मदिरा पान करने लगा। बाजारु औरत से नाजायज संबंध बनाने लगा वो उसे खुब लुटती थी। उसके अकेलापन का फायदा उठाती थी। उसके साथ गंदे पोझेज के फोटो निकाल कर आदित्य को black mail करती थी। 
  
    इन दोनो की  पहली मुलाकात बडी दिलचस्प थी। बारिश हो रही थी और आदित्य अपने रास्ते जा रहा  था और एक पूरी तरह भीगी हुई  और सँफलोन साडी मे  वो लाल रंग उस पर ये मौसम वो लडकी  बला की खुबसुरत दिख रही थी।  उस के  खुबसुरती मे आदित्य ने अपना काबू खो दिया और उसे लिफ्ट के लिये पूछा। 

     आदित्य पूरी तरह फंस गया था। वो एक दिन business tour  के बहाने जानकी के पास आ गया। उस का number भी off आने लगा। वो जानकी के साथ शांत ता पूर्ण जीवन व्यतीत करने लगा। 

   ऐसे ही दिन,साल ,महिने जाने लगे। वो इनके साथ खुश था ,लेकिन नसीब को कुछ और मंजूर था। आदित्य की बेटी मुंबई आ गई। वो नौकरी करने लगी। वो जहा paying guest थी वो जगह उस बाजारु औरत का घर था। उसने वो गंदा धंदा छोडकर मुंबई मे घर मे टिफीन का   व्यवसाय शुरु कर दिया । धीरे धीरे वो व्यापार अच्छा चलने लगा। काफी लोगो का वो पेट भरने लगी। 
  
   वो जो बच्ची  थी उसका नाम मानसी था। मानसी का दिल उस बाजारु औरत के बेटे पर आ गया था।  दोनो काफी नजदीक आ गये थे। उस बाजारु औरत का नाम चंदा था। उस के बेटे का नाम रवि था।  चंदा अपना अतित को भुल कर  नया जीवन अध्याय शुरु कर रही थी।  
    अचानक एक दिन आदित्य मानसी से मिलने मुंबई आ पहुंचा । चंदा घर मे नही थी। रवि भी मानसी के साथ असहज परिस्थिति मे था। वो आदित्य ने देखा और बो ख  लगा । पूरा मौहल्ला इकठ्ठा होने लगा । इतनी भीड देख चंदा को डर लगने लगा तभी  कुछ चिल्लाने की आवाज उसके कानो मे आयी  तो वो उस कमरे की तरफ भागते हुये आयी तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई । उसके सामने आदित्य सिंह अपने खुद के खनन को मार रहा था। दोनो एक दुसरे के दुश्मन बन गये थे तो चंदा ने बीच मे आकर दोनो को दुर कर दिया। सब लोग अपने अपने घर चले गये। 
  
   घर मे शांत वातावरण हो गया और चंदा तो रो ये जा रही थी । आदित्य ने चंदा को पहचान लिया।   आदित्य चंदा के पास जाकर उसके आंसू पो छ ने लगा। तभी रवि ने उसको धक्का दिया। चंदा रवि पर चिल्लाने लगी। 
  
  रवि घबरा कर दुर जाकर बैठ गया और चंदा आदित्य को पकड़कर रोने लगी। उसके बाहो मे रोने लगी। धीरे धीरे उसने आदित्य को सब सच्चाई बता ने लगी। वो कैसे उस गंदी जगह से भागी ये जिंदगी उसने कैसे गुजारी। आदित्य और रवि का रिश्ता भी उसने बताया। रवि आदित्य का खून था। आदित्य की आंखे भिग गई। उसी नम आंखों को पोछ कर वो रवि को गले लगाने जा ही रहा था तो मानसी ने आदित्य को अपने रिश्ते का वास्ता  दिया। 
 
    आदित्य फिर पिघलने वाला था तो वहा जानकी आ धमकी।  उसने सब देखा और उसने मानसी को कहा कि वो आदित्य की औलाद नही है। आ दित्य केहै।
मानसी और जानकी को  संभाल रहा था। आदित्य ने चंदा को अपना कर रवि को खुद का नाम दिया। 

तात्पर्य-    ऐसे ही हर औरत के हालात खराब हो सकते है पर उसका दिल बुरा  ऩही होता है।
  - स्वरचित कथा 
  -   सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित रहेंगे और कृपया इस कथा की चोरी ना करे। 
  -अभिलाषा देशपांडे 
प्रतियोगिता हेतू मेरी लिखी  कथा




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3 Comments

VIJAY POKHARNA "यस"

28-Dec-2022 07:31 PM

निश्चित रूप से दिल कि सुन्दरता ही वास्तविक सुंदरता है। 🙏🙏

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Gunjan Kamal

28-Dec-2022 03:15 PM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 🙏🏻🙏🏻

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